दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। स्वाइन फ्लू को आम तौर पर एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के नाम से जाना जाता है। आज एच1एन1 वायरस मौसमी इन्फ्लुएंजा के वायरस के रूप में भी फैलता है। यह एक संक्रामक श्वसन रोग है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है। दूषित हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने पर भी संक्रमण का खतरा रहता है।

स्वाइन फ्लू का संक्रमण हर व्यक्ति में एक जैसा असर नहीं करता। ज्यादातर लोगों में यह हल्के या सामान्य लक्षणों के साथ ठीक हो जाता है। लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में इसके गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है।

कैसे पहचानें स्वाइन फ्लू को

स्वाइन फ्लू के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं। तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, अत्यधिक थकान और नाक बहना इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ लोगों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं, खासकर बच्चों में। हर मरीज को बुखार हो यह जरूरी नहीं है।

सामान्य सर्दी और फ्लू में भी कई लक्षण समान होते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से यह तय करना ठीक नहीं है कि संक्रमण स्वाइन फ्लू ही है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक जांच की सलाह दे सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए। यदि सांस लेने में परेशानी हो, सीने में लगातार दर्द या दबाव महसूस हो, अत्यधिक कमजोरी या चक्कर आएं, भ्रम की स्थिति बने, पेशाब बहुत कम हो जाए या बुखार और खांसी ठीक होने के बाद फिर तेजी से बढ़ जाए तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

घर पर क्या करें

यदि लक्षण हल्के हैं तो सबसे पहला उपाय है पर्याप्त आराम। शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए बीमारी के दौरान काम का बोझ कम करें और पर्याप्त नींद लें।

पानी और दूसरे तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लेते रहें। पानी, सूप, नींबू पानी या अन्य सामान्य तरल पदार्थ शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। भूख कम हो तो जबरदस्ती भारी भोजन करने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।

बीमार व्यक्ति को घर में भी जहां तक संभव हो दूसरे लोगों से दूरी रखनी चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत फेंकें और हाथ अच्छी तरह धोएं। घर में पर्याप्त हवा का आवागमन भी रखें। यदि दूसरे लोगों के बीच जाना जरूरी हो तो मास्क संक्रमण फैलने का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।

एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि स्वाइन फ्लू वायरल संक्रमण है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है। एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करते। कुछ मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं। इनका लाभ बीमारी शुरू होने के पहले एक से दो दिनों में अधिक होता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को लक्षण आने पर डॉक्टर से जल्दी संपर्क करना चाहिए।

बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतें बदलें

स्वाइन फ्लू से बचाव केवल बीमारी फैलने के समय नहीं बल्कि रोज की आदतों से जुड़ा है। सबसे पहले हाथ धोने की आदत को गंभीरता से लेना चाहिए। बाहर से घर आने के बाद, खाना खाने से पहले और खांसने या छींकने के बाद साबुन और पानी से हाथ साफ करें। आंख, नाक और मुंह को बार बार छूने से बचें।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक समय बिताने से बचें। घर, कार्यालय और कमरे में हवा का आवागमन बनाए रखें। यदि आसपास कोई व्यक्ति बीमार है तो उससे बहुत नजदीकी संपर्क से बचें।

बीमार होने पर भी कार्यालय, स्कूल या भीड़ वाली जगह पर जाने की आदत बदलनी होगी। पहले स्वस्थ होना जरूरी है। सामान्य गतिविधियों में तब लौटना बेहतर है जब लक्षणों में सुधार हो रहा हो और कम से कम 24 घंटे से बुखार न आया हो तथा बुखार कम करने वाली दवा न ली गई हो।

रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए क्या करें

मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता किसी एक खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खे से नहीं बनती। इसके लिए पूरी जीवनशैली का संतुलित होना जरूरी है।

रोज के भोजन में दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दूध या उसके विकल्प, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। बहुत ज्यादा तला भोजन, अत्यधिक चीनी और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को कम करें। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।

नींद को सबसे अधिक नजरअंदाज किया जाता है। रोज पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देर रात तक मोबाइल चलाने और लगातार जागने की आदत कम करनी चाहिए।

नियमित शारीरिक गतिविधि भी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। रोज तेज चाल से चलना, योग, हल्का व्यायाम या अपनी क्षमता के अनुसार कोई दूसरी शारीरिक गतिविधि स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। धूम्रपान से बचना भी श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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