सड़कों के किनारे, खाली मैदानों, खेतों की मेड़ों, रेलवे पटरियों और घरों के आसपास उगने वाला पौधा गाजर घास कई जगहों पर एक बड़ी समस्या बन चुका है। इसका वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस है। इसे कांग्रेस घास भी कहा जाता है।

गाजर घास मूल रूप से अमेरिका का पौधा है। यह 1950 के दशक की शुरुआत में अमेरिका से आयात किए गए गेहूं के साथ इसके बीजों के रूप में यहां पहुंची। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार इसे पहली बार 1955-56 के आसपास पुणे, महाराष्ट्र में देखा गया था। इसके बाद यह तेजी से देश के अलग अलग हिस्सों में फैलती चली गई।

यह पौधा इतनी तेजी से फैलता है क्योंकि इसमें बहुत बड़ी संख्या में बीज पैदा करने की क्षमता होती है। इसके बीज हवा, पानी, वाहनों, पशुओं और कृषि गतिविधियों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि आज यह भारत के अनेक हिस्सों में खेतों और गैर कृषि क्षेत्रों में दिखाई देता है।

क्यों खतरनाक है गाजर घास ?

गाजर घास केवल एक अनचाहा पौधा नहीं है। यह खेती, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य तीनों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।

सबसे बड़ा खतरा इसकी परागकण और पौधे में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों से है। इसके संपर्क में आने या इसके परागकणों के संपर्क में रहने से कुछ संवेदनशील लोगों में त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक संपर्क रहने पर त्वचा संबंधी समस्या गंभीर भी हो सकती है। इसके परागकण सांस के साथ शरीर में पहुंचकर छींक, नाक में जलन और सांस से जुड़ी एलर्जी जैसी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में गाजर घास को डर्मेटाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। इसका असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। पशुओं के लिए भी यह हानिकारक होती है।

खेती के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है। गाजर घास खेत में उगने वाली फसलों के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करती है। इससे फसलों की बढ़वार और उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। यह खाली जमीन से लेकर खेतों, सड़कों और रेलवे पटरियों के आसपास तक तेजी से फैल सकती है।

गाजर घास से बचाव कैसे करें?

गाजर घास को नियंत्रित करने का सबसे आसान तरीका है कि उसे फूल आने और बीज बनने से पहले ही हटा दिया जाए। अगर पौधा छोटा है तो उसे जड़ सहित उखाड़ा जा सकता है। लेकिन इसे हाथ से उखाड़ते समय सावधानी जरूरी है। दस्ताने पहनना चाहिए और संवेदनशील लोगों को सीधे पौधे के संपर्क से बचना चाहिए।

खाली जमीन और खेतों के आसपास नियमित निगरानी भी जरूरी है। जहां गाजर घास दिखाई दे, वहां फूल आने से पहले उसकी सफाई कर देनी चाहिए। बड़े क्षेत्र में समस्या होने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उचित खरपतवारनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

घर के आसपास, स्कूलों, पार्कों, सड़कों और खाली जमीन पर इस पौधे की पहचान करना जरूरी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से हर साल 16 से 22 अगस्त तक पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह के माध्यम से इसके खतरों और नियंत्रण के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।

गाजर घास देखने में भले ही एक सामान्य जंगली पौधा लगे, लेकिन इसका तेजी से फैलना गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए इसे फूल और बीज बनने से पहले नियंत्रित करना, पौधे को संभालते समय सावधानी रखना और आसपास के लोगों को इसके बारे में जागरूक करना ही इससे बचाव का सबसे व्यावहारिक तरीका है।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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