सोशल मीडिया पर इन दिनों यूपीआई को लेकर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। व्हाट्सएप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे संदेशों में कहा जा रहा है कि अब यूपीआई से पैसे भेजना मुफ्त नहीं रहेगा और आम लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए चार्ज देना पडेगा।

सामान्य बैंक खाते से बैंक खाते में किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर ग्राहक से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जा रहा है। यानी अगर आप अपने बैंक खाते से किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में यूपीआई के जरिए पैसे भेजते हैं तो इसके लिए आपको कोई अलग शुल्क नहीं देना है। एनपीसीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बैंक खाते से बैंक खाते में होने वाले यूपीआई लेनदेन ग्राहकों और व्यापारियों के लिए मुफ्त हैं।

फिर शुल्क की बात कहां से आई?

यूपीआई को लेकर भ्रम की एक बडी वजह यह है कि यूपीआई पर होने वाले सभी तरह के लेनदेन को एक जैसा समझ लिया जाता है। वास्तव में बैंक खाते से होने वाला सामान्य यूपीआई भुगतान और दूसरे माध्यमों से होने वाला भुगतान अलग व्यवस्था के तहत आ सकता है।

एनपीसीआई ने 2023 में स्पष्ट किया था कि यूपीआई के 99.9 प्रतिशत से अधिक लेनदेन बैंक खाते से किए जाते हैं और ऐसे बैंक अकाउंट टू बैंक अकाउंट ट्रांजैक्शंस मुफ्त बने हुए हैं। इसी जानकारी में एनपीसीआई ने यह भी बताया था कि पीपीआई यानी प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट या वॉलेट को भी यूपीआई से जोडा गया है। ऐसे मामलों में इंटरचेंज चार्ज लागू हो सकता है, लेकिन यह ग्राहक से नहीं लिया जाता।

यानी यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। यूपीआई की व्यवस्था में किसी बैंक, वॉलेट या दूसरे सेवा प्रदाता के बीच शुल्क हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आम व्यक्ति से हर यूपीआई भुगतान पर पैसा लिया जा रहा है।

तो फिर किन मामलों में पैसा देना पड सकता है?

सबसे पहले सामान्य यूपीआई भुगतान को समझिए। यदि आप अपने बैंक खाते को यूपीआई ऐप से जोडकर किसी व्यक्ति को पैसे भेजते हैं या किसी दुकान पर बैंक खाते से यूपीआई क्यूआर स्कैन करके भुगतान करते हैं, तो सामान्य तौर पर ग्राहक से यूपीआई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाता। यही वह सुविधा है जिसका इस्तेमाल करोडों लोग रोज करते हैं।

दूसरी स्थिति यूपीआई से जुडे वॉलेट या पीपीआई की हो सकती है। पीपीआई वॉलेट को यूपीआई के साथ इंटरऑपेरेबल बनाया गया है। ऐसे भुगतान में इंटरचेंज चार्ज जैसी व्यवस्था हो सकती है, लेकिन एनपीसीआई के अनुसार यह ग्राहक से नहीं लिया जाता। इसलिए इसे सीधे यह कहना कि “यूपीआई पर ग्राहक से चार्ज लग गया” सही नहीं होगा।

तीसरी स्थिति तब आती है जब यूपीआई के जरिए भुगतान का माध्यम बैंक खाता नहीं बल्कि कोई दूसरा वित्तीय साधन हो। उदाहरण के लिए रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से लिंक करके व्यापारी को भुगतान किया जा सकता है। यह सामान्य बैंक खाते से किए जाने वाले यूपीआई भुगतान से अलग व्यवस्था है और इसमें कार्ड से जुडे नियम और शुल्क लागू हो सकते हैं। एनपीसीआई के अनुसार रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोडकर मर्चेंट पेमेंट्स किए जा सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ग्राहक से अलग यूपीआई शुल्क वसूला जाएगा। शुल्क किस पक्ष पर लागू होगा, यह भुगतान के माध्यम और संबंधित बैंक या सेवा की शर्तों पर निर्भर करता है।

यूपीआई पर चार्ज और दूसरे शुल्क में फर्क समझना जरूरी

कई बार किसी बैंक या ऐप की अपनी सेवा के शुल्क को यूपीआई चार्ज समझ लिया जाता है। उदाहरण के लिए क्रेडिट कार्ड से जुडे शुल्क, किसी विशेष वित्तीय सेवा का शुल्क या किसी सेवा प्रदाता की अपनी फीस को सीधे “यूपीआई चार्ज” कहना सही नहीं है।

यूपीआई खुद एक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसके ऊपर बैंक, ऐप, कार्ड, वॉलेट और दूसरी सेवाएं काम करती हैं। इसलिए किसी खास सेवा में शुल्क होने का अर्थ यह नहीं है कि सामान्य यूपीआई भुगतान भी अब सशुल्क हो गया है।

यूपीआई में बदलाव का मतलब शुल्क लगना नहीं

यूपीआई लगातार विकसित होने वाली भुगतान प्रणाली है। इसमें समय समय पर सुरक्षा, लेनदेन सीमा, भुगतान के नए तरीके और दूसरी सुविधाओं से जुडे बदलाव किए जाते हैं। एनपीसीआई की 2026 की सर्कुलर सूची में भी यूपीआई से संबंधित सुरक्षा, लिमिट मैनेजमेंट और मर्चेंट क्यूआर जैसे कई नए दिशा निर्देश दिखाई देते हैं।

इसका उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित और बेहतर बनाना है। इसलिए यूपीआई में कोई नया नियम आने का मतलब यह नहीं होता कि उससे आम यूजर से भुगतान शुल्क लिया जाएगा।

अगर आप अपने बैंक खाते से दोस्त को 500 रुपये भेज रहे हैं, परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज रहे हैं या किसी दुकान पर अपने बैंक खाते से यूपीआई क्यूआर स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं, तो इसे लेकर अभी किसी नए सामान्य यूपीआई चार्ज की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

हां, अगर भुगतान किसी क्रेडिट कार्ड, वॉलेट या दूसरी विशेष वित्तीय सेवा के माध्यम से किया जा रहा है, तो उस माध्यम के अपने नियम और शुल्क हो सकते हैं। इसलिए भुगतान करने से पहले यह देखना जरूरी है कि पैसा किस खाते या साधन से जा रहा है।

 

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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