Mon. May 25th, 2026

Category: विशेष लेख

गजानन माता मंदिर: आस्था, इतिहास, रहस्य और जनविश्वास का अद्भुत संगम

गजानन माता मंदिर बुंदेलखंड की पावन और ऐतिहासिक धरती सदियों से वीरता, संस्कृति और धार्मिक आस्था का केंद्र रही है। इसी क्षेत्र के निवाड़ी जिले में स्थित गढ़कुंढार का गजानन…

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग कहां-कहां हैं स्थित? जानें इन धार्मिक स्थलों के बारे में

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व माना गया है. यह भगवान शिव के प्रतिष्ठित स्थलों में से एक हैं. ज्योतिर्लिंग का शाब्दिक अर्थ ‘ज्योति का लिंग’ होता है, जो…

झाँसी के रानी लक्ष्मीबाई के वंशज

झांसी के अंतिम संघर्ष में महारानी की पीठ पर बंधा उनका बेटा दामोदर राव (असली नाम आनंद राव) सबको याद है. रानी की चिता जल जाने के बाद उस बेटे…

दीपावली: परंपरा, श्रद्धा और जीवन में प्रकाश की यात्रा

धर्म और दर्शन में दीपावली का विविध अर्थ दीपावली भारत में मनाए जाने वाले सबसे उल्लासपूर्ण पर्वों में से एक है। यह केवल दीप जलाने का उत्सव नहीं बल्कि अंधकार…

शास्त्रों में विरोधाभास या विवेकपूर्ण मार्गदर्शन: देवी-देवता पूजा में विधान का रहस्य

धर्म – हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा और उनकी सामग्री को लेकर कई ग्रंथों में अलग-अलग निर्देश मिलते हैं। कभी-कभी यही भिन्नता भ्रम का कारण बन जाती है कि…

हेरत हेरत हे सखी: गुरु-परंपरा और अध्यात्म का संगम

पुस्तक: हेरत हेरत हे सखी लेखक: जगत नारायण पांडेय प्रकशक: फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स मूल्य: 299 यह पुस्तक “हेरत हेरत हे सखी” मूलतः आध्यात्मिक चिंतन और जीवनानुभवों का अनूठा संकलन है। लेखक…

पुण्यतिथि-: स्वर कोकिला लता मंगेशकर के किस गीत को सुनकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी रो दिए

स्वर कोकिला के नाम से मशहूर लता मंगेशकर की दूसरी पुण्यतिथि है। उन्होंने पुरे जीवन काल में 50 हजार से ज्यादा गाने गाए थे। इन पुरे गानों को 30 से…

चौधरी चरण सिंह जो राजनीति के थे असली चौधरी

चौधरी चरण सिंह सिर्फ़ एक राजनीतिज्ञ, एक किसान नेता, एक पार्टी के अध्यक्ष और एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री का नाम ही नहीं था, चरण सिंह एक विचारधारा का भी नाम था.…

जानिए अपने पर्वों के अंतर्निहित गहन निहितार्थों को।

भारतवर्ष एक ऐसा देश है जिसकी संस्कृति अनेकानेक पर्वों से परिपूर्ण है। यह पर्व अकारण या उल्लास मात्र के साधन नहीं,अपितु अन्वर्थ( useless) हैं! कहीं न कहीं प्रकृति में होने…

हरित क्रांति के जनक और देश को अकाल से बचाने वाले कृषि वैज्ञानिक का 98 वर्ष की आयु में निधन

एमएस स्वामीनाथन: जूलॉजी पढ़ रहे थे पर बंगाल में अकाल देख कृषि में आए, फिर इन कदमों से बदली किसानों की जिंदगीदूसरे विश्व युद्ध के समय सन 1943 में बंगाल…

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