सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। आम नागरिक से लेकर बड़े अधिकारी तक लगभग हर कोई किसी न किसी मंच पर सक्रिय है।

सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। आम नागरिक से लेकर बड़े अधिकारी तक लगभग हर कोई किसी न किसी मंच पर सक्रिय है। लेकिन जब बात सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की आती है, तो यह केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का विषय नहीं रह जाता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी गोपनीयता, प्रशासनिक गरिमा और जनता के विश्वास से भी जुड़ जाता है। ऐसे में समय में जरुरत है कि सरकार सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर स्पष्ट, विस्तृत और सख्त दिशा निर्देश जारी करे।

पिछले कुछ वर्षों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जिन्होंने चिंता बढ़ा दी है। कहीं सीमा पर तैनात जवान ड्यूटी के दौरान रील बनाते दिखाई देते हैं, तो कहीं कोई आईएएस अधिकारी कार्यालय में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहा है। अस्पतालों में डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर के भीतर वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। कई बार पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर ड्यूटी के दौरान फिल्मी गानों पर डांस करते नजर आते हैं। इन घटनाओं को कुछ लोग मनोरंजन मान सकते हैं, लेकिन इनके दूरगामी परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

सरकारी कर्मचारी केवल अपने लिए काम नहीं करता, वह राज्य का प्रतिनिधि होता है। उसके हर व्यवहार से सरकार और संस्था की छवि जुड़ी होती है। यदि कोई कर्मचारी अपने कार्यस्थल, कार्यालय, सैन्य क्षेत्र, अस्पताल, न्यायिक परिसर या किसी संवेदनशील स्थान की तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति साझा करता है, तो वह अनजाने में ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक कर सकता है जिसका दुरुपयोग देश विरोधी तत्व कर सकते हैं। कई बार एक साधारण सी दिखने वाली तस्वीर भी महत्वपूर्ण जानकारी उजागर कर देती है।

आज सूचना भी युद्ध का एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुकी है। दुनिया भर में खुफिया एजेंसियां खुले स्रोतों से उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करती हैं। सोशल मीडिया पर डाली गई तस्वीरें, वीडियो, स्थान की जानकारी और समय संबंधी विवरण किसी भी संवेदनशील संस्था की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए यह केवल अनुशासन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।

सरकार को स्पष्ट रूप से यह तय करना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या साझा कर सकते हैं और क्या नहीं। लोकप्रियता के इस दौर में कुछ सेकंड की रील कई बार वर्षों की प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। इसलिए सरकार को सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर एक समान, स्पष्ट और कठोर नीति लागू करे। इससे न केवल सरकारी संस्थाओं की गरिमा बनी रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक अनुशासन और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

अनमोल दुबे

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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