बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की जगह एकजुट और कठोर नीति की जरूरत है। प्रधानमंत्री का संदेश केवल भारत की सुरक्षा तक सीमित नहीं था। यह पूरे क्षेत्र की शांति, स्थिरता और विकास से जुडा हुआ सवाल है। भारत का स्पष्ट मानना है कि साझा भौगोलिक स्थिति को साझा समृद्धि में बदलने का समय आ गया है। इसके लिए सबसे पहले क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त करना होगा।

SCO क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करना है। भारत वर्ष 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना। आज SCO यूरेशिया के एक बडे क्षेत्र को जोडने वाला महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। संगठन के एजेंडे में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ व्यापार, निवेश, संपर्क, ऊर्जा, डिजिटल सहयोग और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे विषय भी शामिल हैं।
भारत के लिए SCO का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि मध्य एशिया भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं से जुडा हुआ क्षेत्र है। बेहतर संपर्क व्यवस्था, व्यापारिक सहयोग और ऊर्जा संबंध क्षेत्र के विकास को नई गति दे सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग को आगे बढाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सुरक्षा और विकास एक दूसरे से जुडे हुए हैं। सुरक्षित क्षेत्र में ही व्यापार बढ सकता है और निवेश आ सकता है।

आतंकवाद पर नकेल कसना क्यों जरूरी है

आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है। यह पूरे क्षेत्र की शांति और विकास के लिए चुनौती है। आतंकवादी संगठन जब हिंसा फैलाते हैं तो उसका असर केवल सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं पडता। इससे आम नागरिकों का जीवन प्रभावित होता है। व्यापार और पर्यटन कमजोर होते हैं। निवेश का वातावरण खराब होता है और देशों के बीच विश्वास भी कम होता है।
SCO जैसे संगठन के सामने यह चुनौती और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके सदस्य देश ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में स्थित हैं जहां आतंकवाद, कट्टरता और अलगाववाद जैसी चुनौतियां लंबे समय से मौजूद रही हैं। ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ केवल बयान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए खुफिया जानकारी साझा करने, आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने, सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और आतंकवादियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न देने जैसी ठोस पहल जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इसी दिशा में है। आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आतंकवाद के खिलाफ नीति में स्पष्टता और एकरूपता जरूरी है। किसी आतंकवादी घटना को अच्छा या बुरा बताने के लिए अलग अलग पैमाने नहीं हो सकते।

SCO केवल देशों का समूह नहीं है। यह एक ऐसे क्षेत्र के भविष्य को दिशा देने वाला मंच है जहां दुनिया की एक बडी आबादी रहती है और अपार आर्थिक संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए शांति और सुरक्षा पहली शर्त है।

भारत ने बिश्केक में इसी सोच को सामने रखा है। आतंकवाद पर निर्णायक नकेल और आर्थिक सहयोग के विस्तार के साथ ही साझा भौगोलिक स्थिति को साझा समृद्धि में बदला जा सकता है। आतंकवाद मुक्त और सुरक्षित क्षेत्र ही मजबूत SCO की नींव बन सकता है।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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