आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। घर के ताजे और संतुलित भोजन की जगह बाहर का तला भुना खाना, ज्यादा तेल वाला भोजन, पैकेज्ड फूड, मीठे पेय और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाला खाना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। इसके साथ शारीरिक गतिविधियां भी कम हुई हैं। घंटों बैठकर काम करना और व्यायाम से दूरी स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
इन बदलावों का एक गंभीर परिणाम फैटी लिवर के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है। फैटी लिवर ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। यही कारण है कि कई लोगों को इसकी जानकारी तब होती है जब किसी दूसरी बीमारी की जांच के दौरान लिवर में चर्बी जमा होने का पता चलता है।
बाहर मिलने वाले समोसे, कचौरी, पिज्जा, बर्गर, फ्राइड चिकन और दूसरी तली हुई चीजों में अक्सर ज्यादा तेल, नमक और कैलोरी होती है। इनका लगातार सेवन शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा और वसा जमा होने का कारण बन सकता है। लंबे समय तक ऐसी आदत बनी रहने पर वजन बढ़ने और शरीर में इंसुलिन के सही तरीके से काम न करने की समस्या पैदा हो सकती है। इसका असर लिवर पर भी पड़ता है।
चीनी से भरे कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मीठी चाय कॉफी और दूसरे मीठे पेय भी समस्या बढ़ा सकते हैं। इनमें मौजूद अतिरिक्त चीनी शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा पहुंचाती है। खासकर फ्रक्टोज का ज्यादा सेवन लिवर में वसा जमा होने से जुड़ा पाया गया है।
फैटी लिवर से बचने के लिए केवल खाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर को सक्रिय रखना भी जरूरी है। आज बहुत से लोगों का काम घंटों कुर्सी पर बैठकर होता है। घर से ऑफिस और ऑफिस से घर तक की यात्रा में भी शारीरिक गतिविधि सीमित रह गई है।
जब शरीर को पर्याप्त गतिविधि नहीं मिलती और भोजन से मिलने वाली कैलोरी जरूरत से ज्यादा होती है तो अतिरिक्त ऊर्जा वसा के रूप में जमा होने लगती है। इसका असर वजन और कमर के आकार पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे यही स्थिति लिवर में वसा जमा होने का कारण बन सकती है।
शुरुआती फैटी लिवर में कई लोगों को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है। समस्या बढ़ने पर लिवर में सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक स्थिति नियंत्रित न होने पर लिवर में फाइब्रोसिस, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
फैटी लिवर के साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग का जोखिम भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए इसे केवल लिवर की बीमारी मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
फैटी लिवर से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण तरीका स्वस्थ जीवनशैली है। खाने में ताजे फल और सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और सीमित मात्रा में स्वस्थ वसा शामिल करें। बाहर के तले भुने भोजन को रोज की आदत न बनाएं। ज्यादा तेल वाले भोजन की मात्रा कम करें।
मीठे पेय और जरूरत से ज्यादा चीनी से दूरी बनाएं। पैकेज्ड और फ्रोजन खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल पर चीनी, नमक, कैलोरी और वसा की मात्रा जरूर देखें।
वजन ज्यादा है तो धीरे धीरे वजन कम करने का प्रयास करें। बहुत तेजी से वजन घटाने की कोशिश न करें। नियमित पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना या कोई दूसरा व्यायाम दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच बीच में उठकर कुछ मिनट चलना भी उपयोगी है।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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