लुटियंस दिल्ली का नाम सुनते ही हमारे मन में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, केंद्रीय मंत्रालय, और सत्ता के गलियारों की तस्वीर उभरने लगती है। यह वही क्षेत्र है जहां से भारत के शासन की दिशा और दशा तय होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस इलाके का नाम ‘लुटियंस दिल्ली’ क्यों पड़ा? आखिर लुटियंस कौन थे और उनके नाम पर देश की राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से का नाम क्यों रखा गया? इस क्षेत्र का निर्माण कब और किस उद्देश्य से किया गया?

भारत की राजधानी नई दिल्ली का सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली क्षेत्र लुटियंस दिल्ली कहलाता है। यह भारत की राजनीतिक, प्रशासनिक और कूटनीतिक शक्ति का केंद्र है। राष्ट्रपति भवन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और भारत की संसद स्थित है। इस क्षेत्र का नाम प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस के नाम पर पड़ा। एडविन लुटियंस का जन्म 1869 में इंग्लैंड में हुआ था।

1911 में दिल्ली दरबार के दौरान ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने घोषणा की कि भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की जाएगी। इसके बाद नई राजधानी के निर्माण की योजना बनाई गई और 1912 में एडविन लुटियंस को इसकी रूपरेखा तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। लगभग दो दशकों तक चले निर्माण कार्य के बाद 1931 में नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन हुआ और यह ब्रिटिश भारत की नई राजधानी बनी।

नई दिल्ली की योजना बनाते समय लुटियंस ने अपने सहयोगी वास्तुकार हर्बर्ट बेकर के साथ मिल कर एक ऐसी राजधानी की कल्पना की जो भव्य होने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान भी दर्शाए। इसके लिए उन्होंने भारतीय स्थापत्य शैली को यूरोपीय डिजाइन के साथ जोड़कर-  गुंबद, छतरियां, जालियां, लाल और पीले बलुआ पत्थर तथा खुले प्रांगण वाली इमारतें डिजाइन की। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में इंडिया गेट, वायसराय हाउस, परिषद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, पटियाला हाउस, हैदराबाद हाउस आदि प्रमुख इमारतें डिजाइन की। लुटियंस दिल्ली का निर्माण अत्यंत सुनियोजित ढंग से किया गया। यहां चौड़ी सड़कें, वृक्षों से आच्छादित मार्ग, बड़े चौराहे, विशाल उद्यान और कम घनत्व वाला आवासीय विकास हैं।

स्वतंत्रता के बाद यही क्षेत्र भारत सरकार के प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। पहले जिन बंगलों में ब्रिटिश अधिकारी रहते थे, उनमें बाद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह, न्यायाधीश और अन्य संवैधानिक पदाधिकारी रहने लगे। समय के साथ यह इलाका देश की सत्ता और नीति निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। पहले जिसे वायसराय हाउस कहा जाता था उसे 1950 में राष्ट्रपति भवन बना दिया गया। परिषद भवन को संसद भवन बनाया दिया गया।

आज के समय में लुटियंस दिल्ली का महत्व और भी बढ़ गया है। वर्ष 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत कई प्रशासनिक भवनों के निर्माण से इस क्षेत्र का स्वरूप आधुनिक हुआ है। पुरानी विरासत को सुरक्षित रखते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ है और हरियाली को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

लुटियंस दिल्ली में अनेक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थान स्थित हैं। रायसीना पहाड़ी पर राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक स्थित हैं, जहां से केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालय संचालित होते हैं। इनके सामने कर्तव्य पथ है। इसी मार्ग पर गणतंत्र दिवस परेड आयोजित होती है। संसद भवन परिसर, इंडिया गेट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, जनपथ, कनॉट प्लेस आदि भी लुटियंस दिल्ली का हिस्सा हैं।

आज ‘लुटियंस दिल्ली’ केवल एक स्थान का परिचायक नहीं है यह देश का पावर का केंद्र भी है क्योंकि यहीं से पूरे देश का शासन चलता है।

अनमोल दुबे

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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