5 अगस्त, 2019 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में दर्ज है। इसी दिन भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करते हुए राज्य का पुनर्गठन किया। इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख, में विभाजित किया गया। बीते सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर ने अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन देखा है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, आधारभूत संरचना का विस्तार, पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं तथा स्थानीय प्रशासन में बदलाव जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
सबसे बड़ा परिवर्तन सुरक्षा के क्षेत्र में दिखाई देता है। लंबे समय तक आतंकवाद, अलगाववाद और पत्थरबाजी जैसी घटनाएं यहां के सामान्य जीवन को प्रभावित करती रहीं। पिछले वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादी नेटवर्क के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए। सीमा पर निगरानी को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया। इससे सामान्य जीवन पहले की तुलना में अधिक स्थिर हुआ। विद्यालय, महाविद्यालय और बाजार अधिक नियमित रूप से संचालित होने लगे तथा आम नागरिकों के दैनिक जीवन में अपेक्षाकृत अधिक सामान्यता दिखाई देने लगी। पर्यटन के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर ने उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता सदैव पर्यटकों को आकर्षित करती रही है, किंतु लंबे समय तक सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण पर्यटकों की संख्या प्रभावित होती थी। पिछले कुछ वर्षों में श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, डल झील, मुगल गार्डन और अन्य पर्यटन स्थलों पर देश तथा विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनेक वर्षों में पर्यटन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इससे होटल, हाउसबोट, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार, रेस्तरां तथा छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि हुई है। ग्रामीण पर्यटन और साहसिक पर्यटन को भी नई पहचान मिली है।
इसके साथ ही आधारभूत संरचना, प्रशासन और जनसेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, नई सुरंगों और पुलों का निर्माण तथा चिनाब रेलवे पुल और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल परियोजना जैसी उपलब्धियों ने क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था को नई गति दी है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नए चिकित्सा महाविद्यालय, अस्पतालों का आधुनिकीकरण, आयुष्मान भारत तथा टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में नए विद्यालय, महाविद्यालय, कौशल विकास केंद्र और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है। डिजिटल शासन के माध्यम से अनेक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हुई हैं, नई औद्योगिक नीति के तहत निवेश, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र में नए अवसर विकसित हुए हैं। कृषि और बागवानी को आधुनिक सुविधाओं, शीत भंडारण और बेहतर विपणन व्यवस्था से सशक्त किया गया है। महिलाओं तथा वंचित वर्गों को समान कानूनी अधिकार और केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिला है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, खेल अवसंरचना और फिल्म उद्योग के पुनर्जीवन ने भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा प्रदान की है। हालांकि इन उपलब्धियों के साथ कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। सीमापार आतंकवाद की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। समय-समय पर सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ होती रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भी पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर ने विकास और परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण यात्रा तय की है।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…