Mon. May 25th, 2026

Category: विशेष लेख

ध्यानचंद की हॉकी के आगे हिटलर ने भी घुटने टेके

मेजर तिवारी की प्रेरणा से हॉकी की शुरुआत करने वाले ध्यानचंद को शायद ही यह भान रहा होगा कि यही हॉकी की स्टिक उनके जीवन को बुलंदियों की सैर कराने…

सावन में हरी सब्जी को करे बिलकुल ना …

श्रावण के महीने को भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। धार्मिक ग्रन्थों की माने तो प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव कैलास पर्वत से पृथ्वी पर अपनी…

वो इक्कीस महीने की तानाशाही का दौर

25 जून 1975 की वह सुबह जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय दिल्ली में ही थे,उनके फ़ोन की घंटी बजती है और दूसरी तरफ़ से आर के धवन…

अद्भुत ही नहीं नेकचंद की नेकदिली का प्रतीक है रॉक गार्डन

फ्रांस के वास्तुकार ली कॉरबिजीयर ने तैयार किया था चंडीगढ़ डिजाइन उस समय इस ‘खूबसूरत शहर’ का डिजाइन फ्रांस के वास्तुकार ली कॉरबिजीयर तैयार कर रहे थे. नेकचंद ने लोगों…

रक्त नालियों में बह रहा, मरीजों को नहीं मिलता: हर साल 6 लाख लीटर खून बर्बाद

रक्त की एक-एक बूंद बेशकीमती होती है क्योंकि ब्लड किसी लैब या फैक्ट्री में नहीं बन सकता। जब कोई डोनर अपना ब्लड देता है तब जाकर किसी एक इंसान की…

रामराजा सरकार को साक्षी मानकर 3 साल के भीतर बुंदेलखंड राज्य बनवा देने का वादा करने वाले को “राम कौ कॉल” चढ़ाकर राम बंधन छलियो को सबक सिखाया जाएगा

बुंदेलखंडl निर्माण मोर्चा ने ओरछा में रामराजा सरकार के चरणो में लाखों राम बंधन कलावा पुजवा कर आगामी मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा में लाखों राम बंधन लोगों की…

क्या कारण रहा जब अल्बर्ट आइंस्टीन परमाणु की खोज के बाद अचानक निराशा, दुख और अवसाद में डूब गए

आइन्स्टाइन के जन्मदिवस पर आसन्न ख़तरे का इंगित अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने जब ऊर्जा का सिद्धांत जिससे परमाणु बम बन सकता था, कि खोज की तो वह बेहद खुश थे। लेकिन…

भारत के नवनिर्माण नहीं अपितु पुनर्निर्माण की जरूरत

भारत के नवनिर्माण नहीं अपितु पुनर्निर्माण की जरूरत जो लोग भी इतिहास में रुचि रखते हैं उनको इरफ़ान हबीब और रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों से आगे जाकर अन्य ऐसे लेखकों…

तस्वीर बनाने वाले के अंतर तल में कहीं न कहीं एक गहरा भाव ज़रूर रहा होगा भगवान के रूप के आग्रह को लेकर।

सोशल मीडिया में इन दिनों एक तस्वीर घूम रही है जिसके बारे में चर्चा है कि बाल्मीकी रामायण में दिए गए विवरणों के आधार पर उकेरा गया है इसे कैनवास…

भारत में असम के बाद झांसी में दूसरा कामख्या देवी का मंदिर जाने क्या है इतिहास

मुगलों से जान बचाने के लिए पहाड़ी से कूदीं थी ‘कैमासन’ देवी मां की विशेष श्रखंला में नवरात्रि में एक बड़े आस्था का केंद्र की अविस्मरणीय जानकारी लाए हैं बुंदेलखंड…

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