भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव किया है। वर्ष 2016 में शुरू हुई यह व्यवस्था आज भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसकी मदद से मोबाइल फोन के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत भुगतान किया जा सकता है।

NPCI के आंकडों के अनुसार मई 2026 में UPI के जरिए करीब 23.20 अरब लेनदेन हुए। इन लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 29.90 लाख करोड रुपये रहा। इसी अवधि में 700 से अधिक बैंक UPI व्यवस्था से जुडे थे। ये आंकडे बताते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान किस स्तर तक पहुंच चुका है।

UPI की खासियत इसकी सरलता है। उपयोगकर्ता अपने बैंक खाते को UPI से जोडकर मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए भुगतान कर सकता है। इसके लिए अलग से डिजिटल वॉलेट में पैसा रखने की जरूरत नहीं होती। यही सरलता छोटे दुकानदारों से लेकर बडे कारोबारियों तक इसके विस्तार का एक प्रमुख कारण बनी है।

अब UPI का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं है। भारत ने कई देशों के साथ डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सहयोग किया है। संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में UPI से जुडी सुविधाएं अलग अलग रूप में उपलब्ध हैं। हालांकि हर देश में इसका मॉडल एक जैसा नहीं है। कहीं भारतीय यात्रियों के लिए QR आधारित भुगतान की सुविधा मिलती है तो कहीं स्थानीय भुगतान प्रणाली के साथ UPI को जोडने का प्रयास किया गया है।

किसी दूसरे देश में UPI लागू करना केवल तकनीकी व्यवस्था स्थापित करने का काम नहीं है। इसके लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंक, भुगतान नेटवर्क, बैंक और नियामक संस्थाओं के बीच सहयोग आवश्यक होता है। सबसे पहले यह तय किया जाता है कि दोनों देशों की भुगतान प्रणालियों को किस तरह जोडा जाएगा। इसके बाद तकनीकी परीक्षण, ग्राहक पहचान, भुगतान निपटान, मुद्रा विनिमय और डेटा सुरक्षा से जुडे नियम तय किए जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI का एक सीधा लाभ विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों को मिल सकता है। जिन देशों और व्यापारियों के यहां UPI स्वीकार किया जाता है, वहां भारतीय उपयोगकर्ता अपने भारतीय बैंक खाते से भुगतान कर सकते हैं। इससे छोटे भुगतान के लिए नकद स्थानीय मुद्रा रखने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि यह सुविधा हर देश और हर व्यापारी के यहां उपलब्ध नहीं होती। इसकी उपलब्धता स्थानीय भुगतान नेटवर्क और संबंधित समझौते पर निर्भर करती है।

भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में काम हुआ है। इससे पर्यटन और खुदरा कारोबार को सुविधा मिल सकती है। छोटे व्यापारी भी डिजिटल भुगतान स्वीकार करके अधिक ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं।

UPI का महत्व सीमा पार भुगतान के संदर्भ में भी बढ़ रहा है। सामान्य अंतरराष्ट्रीय भुगतान में कई बैंक और भुगतान संस्थाएं शामिल हो सकती हैं। मुद्रा विनिमय और सेवा शुल्क भी लागत को प्रभावित करते हैं। यदि दो देशों की तत्काल भुगतान प्रणालियां आपस में जुडती हैं तो कुछ परिस्थितियों में भुगतान को अधिक तेज और कम लागत वाला बनाया जा सकता है।

UPI का वैश्विक विस्तार भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अंतरराष्ट्रीय उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। भारत ने अपने डिजिटल भुगतान अनुभव और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को दूसरे देशों के साथ साझा करने में रुचि दिखाई है। इसका उद्देश्य केवल भुगतान सुविधा का विस्तार करना नहीं है बल्कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के अनुभव को साझा करना भी है।

भारत में UPI के व्यापक उपयोग के बाद अब इसका अगला चरण अंतरराष्ट्रीय भुगतान सहयोग से जुडा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत और दूसरे देश इस व्यवस्था को कितना सुरक्षित, सुलभ और प्रभावी बना पाते हैं।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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