उरई (जालौन)। देश की आजादी के सात दशक बाद भी जालौन नगर में रोडवेज बस स्टैंड न होने से क्षेत्रीय यात्रियों को गंतव्य स्थानों पर जाने के लिये सड़क किनारे ही खड़े होकर रोडवेज बसों के आने का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन वर्ष 2020 में जालौन नगर में प्रदेश सरकार द्वारा लगभग तीन करोड़ की लागत से नये रोडवेज बस स्टैंड निर्माण की शुरूआत करायी गयी थी। जिसका कार्य दो वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका। जिला प्रशासन द्वारा अनेकों बार कार्यदायी संस्था को कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये गये थे लेकिन हर बार कार्यदायी संस्था कार्य को लेकर लापरवाही बरतता रहा। अब कार्यदायी संस्था को अंतिम चेतावनी मार्च माह तक कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम दिया गया है। जिससे उम्मीद है कि मार्च माह के बाद क्षेत्रीय जनता को रोडवेज बस स्टैंड का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा।

उल्लेखनीय हो कि जालौन नगर में आजादी के बाद से ही रोडवेज बसों के लिये कोई बस स्टैंड नहीं था। यह बात हमेशा क्षेत्रीय लोगों के लिये हमेशा परेशानी का सबब बनी रहती थी। नगर में स्थायी रोडवेज बस स्टैंड न होने से हर मौसम में यात्रियों को सड़क किनारे ही खड़े होकर रोडवेज बसों का इंतजार करना पड़ता था। वर्ष 2020 में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की पहल से जालौन नगर में नये रोडवेज बस स्टैंड निर्माण के लिये शासन से लगभग तीन करोड़ रुपये का बजट आवंटित कराया गया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था द्वारा बाबई-चुर्खी रोड पर नये रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण शुरू कराया गया था। लेकिन कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य कच्छपि गति से कराती गयी।

जब इस मुद्दे को नगरवासियों ने उठाया तो जिला प्रशासन द्वारा निर्माणाधीन रोडवेज बस स्टैंड का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिये गये लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य की धीमी गति से चलता रहा। पिछले माह भी जिलाधिकारी द्वारा जब रोडवेज बस स्टैंड का निरीक्षण किया तो कार्यदायी संस्था की लापरवाही सामने आने के बाद उसे अंतिम चेतावनी दी गयी कि मार्च माह तक रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया। इसके बाद अब नगरवासियों व क्षेत्रीय जनता को उम्मीद बंधी है कि मार्च माह से यात्रियों को नये रोडवेज बस स्टैंड का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा। निर्माणाधीन रोडवेज बस स्टैंड का जब मीडिया टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया तो अभी भी लगभग तीस प्रतिशत से ज्यादा कार्य अधूरा है। जिसे तीन माह में कार्यदायी संस्था को पूरा कराने की चुनौती से कम नहीं है।

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