नए भारत की पहचान केवल तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर से नहीं बन रही है। इसकी एक बड़ी तस्वीर समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका से भी सामने आ रही है। आज महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रही हैं जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता था। सेना, पुलिस, विज्ञान, विमानन, अंतरिक्ष, खेल और प्रशासन से लेकर सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह बदलाव केवल अवसर मिलने तक सीमित नहीं है। महिलाएं जिम्मेदारियां संभाल रही हैं और कठिन परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।

इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी की ओर से शुरू किया गया देश का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स है। हरियाणा के मानेसर स्थित एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी में राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की चुनिंदा महिला कर्मियों को इस विशेष प्रशिक्षण का अवसर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिला कर्मियों को आतंकवाद विरोधी अभियानों और दूसरी कठिन सुरक्षा परिस्थितियों के लिए तैयार करना है।

कमांडो प्रशिक्षण सामान्य प्रशिक्षण से अलग होता है। इसमें शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती, अनुशासन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और टीम के साथ तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से लेकर शहरी और जंगल क्षेत्रों में अभियान चलाने, बंधक बचाने, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, तलाशी और नजदीकी लड़ाई जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी कराई जाती है। ऐसी परिस्थितियों में कुछ सेकंड का निर्णय भी पूरे अभियान की दिशा बदल सकता है। इसलिए यहां केवल ताकत नहीं बल्कि धैर्य, समझ और सटीकता भी जरूरी होती है।

इस पहल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पहले से ही लगातार बढ़ रही है। पुलिस बलों में महिला कर्मियों की संख्या बढ़ी है। कई राज्यों में महिला पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था के साथ साथ संवेदनशील मामलों और विशेष अभियानों में भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी महिलाएं सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक अलग अलग जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। अब उन्हें विशेष कमांडो प्रशिक्षण मिलने से उनके लिए जिम्मेदारी के नए क्षेत्र खुल सकते हैं।

नए भारत में महिलाओं की भागीदारी को केवल महिला सशक्तिकरण के एक नारे के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। इसे देश की कार्यक्षमता और सामर्थ्य से जोड़कर देखने की जरूरत है। देश की आधी आबादी यदि शिक्षा, रोजगार, विज्ञान, सुरक्षा और नेतृत्व के क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती है तो इसका सीधा लाभ पूरे देश को मिलता है। जितनी अधिक प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा उतनी ही मजबूत व्यवस्था तैयार होगी।

आज का भारत उस सोच से आगे बढ़ रहा है जिसमें कुछ काम केवल पुरुषों के लिए और कुछ काम केवल महिलाओं के लिए तय माने जाते थे। कमांडो प्रशिक्षण लेती महिला कर्मियों की तस्वीर इसी बदलती सोच को सामने रखती है। आधी आबादी देश की सुरक्षा और निर्माण दोनों में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे रही है। यही भागीदारी आने वाले भारत को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने वाली है। भारत में महिलाओं ने पहले ही कई क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रमाण दिया है। अब सुरक्षा जैसे क्षेत्र में भी उनकी भूमिका का विस्तार इसी बदलाव का हिस्सा है।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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