बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में पानी से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के दौरान जलभराव, सीवर लीकेज और पाइपलाइन में खराबी के कारण गंदगी और दूषित पानी साफ पानी के स्रोत तक पहुंच सकता है। कई बार पानी देखने में बिल्कुल साफ होता है, लेकिन उसमें बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं।

घर तक पहुंचने के बाद भी पानी पूरी तरह सुरक्षित रहे, यह जरूरी नहीं है। पानी की टंकी में लंबे समय तक पानी जमा रहने, टंकी की नियमित सफाई न होने या RO की समय पर सर्विसिंग न होने से पानी दोबारा दूषित हो सकता है। यही दूषित पानी जब पीने के लिए इस्तेमाल होता है तो डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पेट से जुड़े संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

इसीलिए मानसून के दौरान केवल पानी को फिल्टर करना ही पर्याप्त नहीं है। पानी जहां से घर में आ रहा है, जिस टंकी में जमा हो रहा है और जिस RO से होकर पीने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, इन सभी की स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है।

बारिश में पानी दूषित होने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

मानसून के दौरान बारिश का पानी अपने साथ मिट्टी, कचरा और दूसरी अशुद्धियां बहाकर ले जाता है। कई जगह जलभराव होने पर सीवर का पानी भी आसपास फैल सकता है। यदि पानी की पाइपलाइन में लीकेज हो तो बाहर का दूषित पानी पाइपलाइन के अंदर पहुंचकर सप्लाई के पानी को भी प्रभावित कर सकता है।

घर की पानी की टंकी भी बन सकती है संक्रमण का स्रोत

अक्सर लोग मान लेते हैं कि घर में RO लगा है तो पानी पूरी तरह सुरक्षित है। RO पानी को फिल्टर करता है, लेकिन घर की पानी की टंकी को साफ नहीं करता।

टंकी की नियमित सफाई न होने पर उसकी सतह और तल में मिट्टी, धूल, जंग, शैवाल और दूसरी गंदगी जमा हो सकती है। लंबे समय तक सफाई न होने पर सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना भी बढ़ सकती है।

अगर टंकी खुली है तो धूल, कीड़े, मच्छर और बारिश का पानी भी उसमें पहुंच सकता है। इसलिए पानी की टंकी को हमेशा अच्छी तरह ढककर रखना चाहिए।

दूषित पानी से किन बीमारियों का खतरा?

दूषित पानी का सबसे ज्यादा असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। इससे डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और दूसरी आंतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में टाइफाइड और हैजा जैसे गंभीर संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

दूषित पानी से होने वाले संक्रमण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

पानी की टंकी कितने समय में साफ करनी चाहिए?

सामान्य तौर पर घर की पानी की टंकी की सफाई हर 3 से 6 महीने में कराना उचित माना जाता है। लेकिन यह अंतराल पानी की गुणवत्ता, टंकी की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।

अगर पानी का रंग, स्वाद या गंध बदलने लगे, पानी में कण या तलछट दिखाई दे या टंकी में गंदगी नजर आए तो निर्धारित समय का इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में टंकी की जांच और सफाई तुरंत करानी चाहिए।

RO की सफाई और फिल्टर बदलना क्यों जरूरी है?

RO की क्षमता हमेशा एक जैसी नहीं रहती। समय के साथ फिल्टर में गंदगी जमा होती जाती है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल RO लगवा लेना पर्याप्त नहीं है। उसकी नियमित सर्विसिंग भी जरूरी है।

आमतौर पर सेडिमेंट या प्री फिल्टर को लगभग 3 से 6 महीने में, कार्बन फिल्टर को 6 से 12 महीने में और पोस्ट कार्बन फिल्टर को लगभग 12 महीने में बदलने की जरूरत पड़ सकती है। RO मेम्ब्रेन की उम्र आमतौर पर 1 से 2 साल तक हो सकती है।

हालांकि यह कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। पानी की गुणवत्ता और उपयोग के आधार पर फिल्टर इससे पहले भी बदलने पड़ सकते हैं। पानी का स्वाद, गंध या फ्लो बदलने लगे तो RO की जांच करवानी चाहिए।

सिर्फ फिल्टर बदलना भी पर्याप्त नहीं है। RO की पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और मशीन के दूसरे हिस्सों की सफाई और सर्विसिंग भी जरूरी है।

क्या RO का पानी हमेशा सुरक्षित होता है?

नहीं। RO तभी प्रभावी तरीके से काम करेगा जब उसका रखरखाव सही तरीके से किया जाए। पुराने फिल्टर, खराब मेम्ब्रेन, गंदी पाइपलाइन या लंबे समय से साफ न किया गया स्टोरेज टैंक पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए RO को लगवाने के बाद उसकी सर्विसिंग की तारीख और फिल्टर बदलने का रिकॉर्ड रखना उपयोगी है।

घर में पानी की गुणवत्ता कैसे जांचें?

सबसे पहले पानी के रंग, गंध और स्वाद में होने वाले बदलाव पर ध्यान दें। पानी में धुंधलापन, कण या तलछट दिखाई दे तो उसकी जांच करवाएं।

TDS मीटर से पानी में मौजूद घुले हुए ठोस पदार्थों का स्तर देखा जा सकता है। pH टेस्ट किट से pH की जांच की जा सकती है। लेकिन केवल TDS या pH सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि पानी हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित है।

यदि पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में पानी का परीक्षण कराना बेहतर है। खासकर बोरवेल, हैंडपंप या अन्य स्थानीय जल स्रोतों के पानी की समय-समय पर माइक्रोबायोलॉजिकल जांच उपयोगी हो सकती है।

बारिश के मौसम में अगर पानी का रंग, स्वाद या गंध बदल जाए तो उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। टंकी की सफाई कराएं, पाइपलाइन की जांच करवाएं और जरूरत पड़ने पर पानी की लैब टेस्टिंग कराएं।

याद रखें, साफ दिखाई देने वाला पानी जरूरी नहीं कि पूरी तरह सुरक्षित भी हो। मानसून में पानी की थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए इस मौसम में टंकी की सफाई, RO की सर्विसिंग और पानी की गुणवत्ता की जांच को घर की नियमित स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहिए।

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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