कामजं मृगया द्युतम स्त्रीः पणं तथैव च।
व्यासनं व्यासनार्थज्ञानैश्च चतुर्विधमुदाहृतम्।
हमारे यहां जानवरों का शिकार, जुआ, स्त्री, और शराब पीना चार प्रकार के व्यसन बताए गए हैं। जो व्यक्ति के चरित्र और नैतिक स्थिति के लिए हानिकारक हैं। इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही व्यक्ति सच्चे अर्थों में सफल जीवन जीता है।
लेकिन विडंबना यह है कि जिस देश की सभ्यता ने आत्मसंयम को सर्वोच्च आदर्श बनाया, वहीं आज का एक बड़ा युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, सोशल मीडिया पर गलत जीवन शैली का आकर्षण और आसानी से उपलब्ध नशीले पदार्थ युवाओं को ऐसी राह पर ले जा रहे हैं, जहां से लौटना कठिन हो जाता है।
युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मकता ही देश के भविष्य का निर्माण करती है। यदि यही युवा नशे के शिकार हो जाएं तो राष्ट्र की विकास यात्रा भी प्रभावित होती है। नशा सबसे पहले व्यक्ति के मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है। उसकी सोचने और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है। पढ़ाई में रुचि समाप्त हो जाती है, कार्यक्षमता घटती है और आत्मविश्वास टूटने लगता है। धीरे-धीरे व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक जाता है। अनेक मामलों में अवसाद, हिंसक व्यवहार, अपराध की प्रवृत्ति और आत्महत्या जैसे गंभीर परिणाम भी सामने आते हैं।
नशे का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसका सबसे बड़ा आघात उसके परिवार को सहना पड़ता है। जिस घर में कोई सदस्य नशे का आदी हो जाता है, वहां आर्थिक संकट बढ़ने लगता है। परिवार की आय का बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च होने लगता है। घरेलू हिंसा, झगड़े और सामाजिक अपमान जैसी समस्याएं भी जन्म लेने लगती हैं। कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। एक व्यक्ति की लत पूरे परिवार की खुशियां छीन लेती है।
समाज पर इसका प्रभाव और भी व्यापक होता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, हिंसा, तस्करी और कानून व्यवस्था की चुनौतियों को बढ़ाती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नशा युवाओं की रचनात्मक शक्ति को नष्ट कर देता है। जो युवा वैज्ञानिक, शिक्षक, सैनिक, उद्यमी या कलाकार बन सकते थे, वे नशे के कारण अपने जीवन की दिशा खो देते हैं। यह केवल व्यक्तिगत हानि नहीं, बल्कि राष्ट्र की मानवीय पूंजी का नुकसान है।
आज हमें आवश्यकता है की हम नशे के कारणों को समझे। अधिकांश युवा जानबूझकर नशे की शुरुआत नहीं करते। कई बार मित्रों के साथ, जिज्ञासा, तनाव से राहत पाने की इच्छा या असफलता से निराश होकर वे इस रास्ते पर कदम रखते हैं। कुछ समय बाद यही आदत लत बन जाती है और फिर उससे बाहर निकलना कठिन हो जाता है। इसलिए समाधान केवल कानून नहीं, बल्कि जागरूकता, संवाद, परामर्श और सामाजिक सहयोग में भी निहित है।
सरकार ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ शुरू किया है। इस आंदोलन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से परिचित कराना, उन्हें स्वस्थ और सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा पूरे समाज को इस अभियान का सहभागी बनाना है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, युवा संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से यह अभियान व्यापक जन-जागरूकता का माध्यम बन सकता है।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह समस्या के उपचार के साथ साथ उसकी रोकथाम पर भी बल देता है। यदि किसी युवा को समय रहते सही मार्गदर्शन, परामर्श और भावनात्मक सहयोग मिल जाए तो वह नशे की ओर बढ़ने से पहले ही रुक सकता है। अभियान के माध्यम से खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों, कौशल विकास और सामुदायिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और जीवन के प्रति नई आशा पैदा होगी।
नशा मुक्त भारत का सपना केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसमें परिवार, विद्यालय, समाज और प्रत्येक नागरिक की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। माता पिता को बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना चाहिए। शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों पर ध्यान देना चाहिए। मित्रों को भी अपने साथियों को नशे से दूर रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मीडिया और सोशल मीडिया को भी ऐसी सामग्री को बढ़ावा देना चाहिए जो स्वस्थ जीवन शैली और सकारात्मक सोच को प्रेरित करे।
अनमोल दुबे
आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…