बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और गर्मी राहत तो लेकर आता है, लेकिन यही मौसम रसोई में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरणों के लिए परेशानी का कारण भी बन जाता है। यदि उनकी समय पर सफाई और देखभाल न की जाए तो वातावरण में बढ़ी हुई नमी के कारण किचन में उपयोग होने वाले कई उपकरण बड़ी बीमारी के करक बन सकते है। इन पर हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यही बैक्टीरिया भोजन के माध्यम से शरीर में पहुंचकर फूड पॉइजनिंग, दस्त, उल्टी, पेट दर्द और अन्य संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

चाकू और छीलनी

बरसात के मौसम में यदि चाकू और छीलनी को धोने के बाद गीला ही रख दिया जाए तो उन पर लंबे समय तक नमी बनी रहती है। साधारण लोहे या कार्बन स्टील के चाकू और छीलनी पर जल्दी जंग लग सकती है। जंग लगने से उनकी धार खराब होने लगती है और सब्जियां या फल काटते समय उनकी सतह पर जंग के कण भी लग सकते हैं। लकड़ी के हैंडल वाले चाकू या छीलनी में नमी जल्दी भर जाती है, जिससे फफूंदी और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा कच्ची सब्जियां, फल, मांस या अन्य खाद्य पदार्थ काटने के बाद यदि चाकू को बिना अच्छी तरह धोए दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो उस पर मौजूद बैक्टीरिया दूसरे खाद्य पदार्थों में पहुंच सकते हैं। इससे साल्मोनेला, ई. कोलाई और अन्य हानिकारक जीवाणुओं के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

इन समस्याओं से बचने के लिए चाकू और छीलनी को हर उपयोग के बाद गर्म पानी और बर्तन धोने वाले साबुन से अच्छी तरह साफ करें। धोने के तुरंत बाद उन्हें सूखे कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। इन्हें सिंक में गीला छोड़ने या पानी में डुबोकर रखने से बचें। यदि संभव हो, तो स्टेनलेस स्टील के चाकू और छीलनी का प्रयोग करें क्योंकि इनमें जंग लगने की संभावना काफी कम होती है और इन्हें साफ रखना भी आसान होता है। यदि किसी चाकू पर जंग अधिक लग गई हो या हैंडल में फफूंदी दिखाई दे तो उसे बदल देना ही बेहतर होता है।

लकड़ी के चकला और बेलन 

भारतीय रसोई में लकड़ी के चकला और बेलन का सबसे अधिक उपयोग होता है। लेकिन बरसात के मौसम में यही उपकरण सबसे अधिक नमी सोख लेते हैं। लकड़ी एक प्राकृतिक पदार्थ है, उसमें छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जो पानी और नमी आसानी से शोक लेते है। यदि चकला और बेलन पूरी तरह सूखा ना हो तो उनमें फफूंदी, यीस्ट और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।

कई बार लकड़ी में दरारें भी पड़ जाती हैं, जिनमें गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। सामान्य सफाई करने पर भी ये पूरी तरह बाहर नहीं निकलते और लंबे समय तक संक्रमण का खतरा बनाए रखते हैं। ऐसे चकला और बेलन पर रोटी, पूरी या पराठा बेलने से ये सूक्ष्म जीव सीधे भोजन के संपर्क में आ जाते हैं। और अनेकों बीमारीओं को जन्म देते है।

इससे बचने के लिए चकला और बेलन को हर उपयोग के बाद हल्के गर्म पानी से साफ करें और तुरंत सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ दें। इन्हें कभी भी लंबे समय तक पानी में भिगोकर न रखें। बरसात के दिनों में सप्ताह में एक या दो बार कुछ घंटों के लिए धूप में रखने से उनमें जमी नमी निकल जाती है और फफूंदी बनने की संभावना कम हो जाती है। यदि लकड़ी पर काले या हरे रंग के धब्बे, बदबू या गहरी दरारें दिखाई दें, तो ऐसे चकला और बेलन का उपयोग बंद कर देना चाहिए।

बरसात के मौसम में केवल भोजन को ढककर रखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन बनाने वाले उपकरणों की स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। चाकू, छीलनी, चकला और बेलन की नियमित सफाई, एक छोटी सी आदत है, लेकिन इससे कई प्रकार के संक्रमण और खाद्य जनित बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप अपने परिवार के भोजन को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बना सकते हैं।

अनमोल दुबे

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By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

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