देश- भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने इसके ट्रायल को मंजूरी दे दी है और भारतीय रिजर्व बैंक करीब 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापने की तैयारी में है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्य वर्ग के नोट भी पॉलीमर पर छापे जा सकते हैं। हालांकि इससे मौजूदा कागजी नोट बंद नहीं होंगे। दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलेंगे।

हम जब नए नोट कि बात कर रहे है तो सबसे बड़ा सवाल आता है कि आखिर नोट बनते कैसे है? क्या सरकार अपने मन से कभी भी नोट छाप सकती है? नोट बनने कि सामग्री कैसे तय होती हैं।

भारत में बैंक नोट नासिक (महाराष्ट्र), देवास (मध्य प्रदेश), मैसूर (कर्नाटक), सालबोनी (पश्चिम बंगाल) चार प्रमुख प्रेसों में छापे जाते हैं।

नोट छापने की प्रक्रिया किसी मशीन का बटन दबाने भर से शुरू नहीं होती। सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक यह तय करता है कि देश में कितने नए नोटों की आवश्यकता है। इस दौरान कई बातों का आकलन किया जाता है। पुराने और खराब हो चुके नोट कितने हैं, अर्थव्यवस्था में नकदी की मांग कितनी है, विभिन्न मूल्य वर्ग के नोटों की उपलब्धता कैसी है। इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद तय किया जाता है कि किस मूल्य के कितने नोट छापे जाएंगे।

उसके बाद सबसे पहले विशेष सुरक्षा कागज तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर अलग अलग रंगों में डिजाइन छापी जाती है। फिर महात्मा गांधी की तस्वीर, अशोक स्तंभ, मूल्य अंक, सूक्ष्म अक्षर, उभरी हुई छपाई और अन्य सुरक्षा फीचर जोड़े जाते हैं।

इसके बाद प्रत्येक नोट को एक अलग सीरियल नंबर दिया जाता है। यही नंबर हर नोट की अलग पहचान बनाता है। अंत में मशीनों और विशेषज्ञों की मदद से हर नोट की गुणवत्ता की जांच होती है। यदि किसी नोट में मामूली भी त्रुटि मिलती है तो उसे नष्ट कर दिया जाता है।

भारतीय बैंक नोट विशेष प्रकार के कॉटन फाइबर और कपास आधारित सब्सट्रेट पर तैयार किए जाते हैं। इसी वजह से नोट सामान्य कागज की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं और जल्दी नहीं फटते।

इसके साथ ही नकली नोटों को रोकने के लिए भारतीय करेंसी में वाटरमार्क, सुरक्षा धागा, माइक्रो लेटरिंग, उभरी हुई छपाई, रंग बदलने वाली स्याही, सी थ्रू रजिस्टर, दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्पर्श से पहचानने योग्य निशान जैसे कई उन्नत सुरक्षा फीचर दिए जाते हैं। इन्हीं तकनीकों के कारण असली नोट की नकल करना बेहद कठिन होता है।

अब सवाल आता है कि प्लास्टिक के नोट कैसे होगे और कैसे छापे जाएगे? पॉलीमर नोट वास्तव में सामान्य प्लास्टिक नहीं होते। इन्हें विशेष प्रकार के पॉलीमर सब्सट्रेट पर तैयार किया जाता है। यह सामग्री हल्की होती है, लेकिन काफी मजबूत होती है। इसी पर नोट की पूरी छपाई की जाती है। भारत में प्रस्तावित ₹10 और ₹20 के नोट भी इसी तकनीक से तैयार किए जाएंगे। इसके लिए आरबीआई ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की आपूर्ति हेतु वैश्विक निविदा प्रक्रिया शुरू की है।

पॉलीमर नोटों की छपाई पारंपरिक कागजी नोटों जैसी नहीं होती। सबसे पहले विशेष पॉलीमर शीट तैयार की जाती है। फिर उस पर बहुरंगी सुरक्षा मुद्रण किया जाता है। इसके बाद पारदर्शी विंडो, विशेष होलोग्राम, उन्नत सुरक्षा तत्व और सीरियल नंबर जोड़े जाते हैं। इन नोटों में पारदर्शी खिड़की जैसी तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जिसे नकली बनाना बेहद कठिन होता है।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, रोमानिया, वियतनाम, ब्रुनेई, सिंगापुर, मलेशिया, नाइजीरिया जैसे देशों ने पॉलीमर बैंक नोट पहले से ही चलन में हैं। इन नोटों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी लंबी उम्र है। ये पानी से खराब नहीं होते, धूल और गंदगी का इन पर कम असर पड़ता है, ये आसानी से नहीं फटते और इनमें उन्नत सुरक्षा फीचर लगाए जा सकते हैं।

भारत जैसे विशाल देश में जहां हर साल करोड़ों नोट खराब होने के कारण बदलने पड़ते हैं। वहां यदि पॉलीमर नोट अपेक्षा के अनुरूप टिकाऊ साबित होते हैं तो नोटों की औसत आयु बढ़ेगी, नकली नोटों पर लगाम लगेगी और लंबे समय में छपाई की लागत भी कम हो सकती है।

फिलहाल ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोटों का ट्रायल इस दिशा में पहला बड़ा कदम है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में भारतीय करेंसी का स्वरूप बदल सकता है।

 

About The Author

Avatar

By Anmol Dubey

आधा लेखक, आधा पत्रकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights