डीयू के सत्यवती कॉलेज में फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन ने किया किताबें ज़रा हटके उत्सव का पहला आयोजन
डीयू के सत्यवती कॉलेज में एक दिवसीय ‘किताबें ज़रा हटके उत्सव’ का आयोजन किया गया। आयोजन फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन ने किया। इसमें 50 से अधिक लेखक और 1000 से अधिक श्रोता और पाठक पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत सत्यवती कॉलेज के प्रिंसिपल, प्रो. सुभाष कुमार सिंह , डॉ. तनूजा, डॉ. डेज़ी राज, डॉ. मुनेश यादव एवं नीलम जासूस के संपादक सुबोध भारतीय ने दीप प्रज्जवलन कर किया गया।
पहला सत्र : हिंदी में हॉरर फिक्शन रहा।

हॉरर में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले लेखक देवेंद्र प्रसाद ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने बहुत कुछ बदला है, आज के युवाओं को आप सिर्फ पढ़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। उनकी किताब ‘कब्रिस्तान वाली चुडैल’ को डेढ़ करोड़ ज्यादा लोग ऑडियो में सुन चुके हैं उनकी यह किताब फिल्म निर्माणधीन हैं। लेखनी में बदलाव को लेकर लेखक मनमोहन भाटिया ने कहा युवाओं म हॉरर पढ़ने का बाद क्रैज़ है, हमें उन्हे इस विधा मे अधिक से अधिक और बेहतरीन कहानियाँ देनी होंगी! आज का समय gen-z का समय है, इसमें समय के अनुसार लेखक को भी बदलना होगा। आज के युवाओं को देखते है फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन की हॉरर किताबें ऑडियो में भी मौजूद है।
80 से 90 के दशक में हिंदी हॉरर में सबसे ज्यादा बिकने वाले लेखकों में शुमार सुप्रसिद्ध लेखक ‘परशुराम शर्मा’ ने कहा कि दरअसल युवा वर्ग ही नहीं बल्कि हर वर्ग शुरू से ही हॉरर कहानियों को पढ़ने मे खूब रुचि लेता रहा है पर इन दिनों प्रकाशकों द्वारा इस विधा पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया गया जो फ्लाईड्रीम्स बहुतायत मे कर नए पाठकों को जोड़ रहा है। पहले सत्र में परशुराम शर्मा के बहुप्रतीक्षित बुलबुल हॉरर उपन्यास का कवर विमोचन किया गया। कवर विमोचन पर लेखक परशुराम शर्मा ने कहा ये उनकी लिखी अब तक सभी हॉरर कहानियों से ज्यादा डरावना होने वाला है। यह पुस्तक सीरीज में चलेगी। कहानी में मुख्य पात्र बुलबुल एक ऐसी कैरेक्टर है जो किसी भी घर में जाती है तो उस घर में सारा काम अव्यवस्थित हो जाता है। उन्होंने कहा किताब पढ़िए फिर पता चलेगा 9 साल की बच्ची भी कैसे हॉरर पैदा कर सकती है।
मनमोहन शर्मा ने अपनी नई पुस्तक मिस्टर और मिसेज लाइट के बारे में कहा ‘ये पुस्तक gen z को लेकर है। इस पुस्तक का नाम प्रकाश और रोशनी पात्रो से रखा गया है।‘
इसी सत्र में फलाईड्रीम्स ने आने वाली हॉरर किताब ‘रूठियाई जंक्शन’ का कवर विमोचन किया। नवीन लेखक गोलूसेन ने पुस्तक की कहानी का जिक्र करते हुए कहा यह दो कैरेक्टर पर आधारित है। इस किताब में आप दुनिया को पेड़ के अंदर देख पाएंगे। सत्र के अंत मे देवेंद्र पाण्डेय की आने वाली हॉरर किताब ‘अरण्य कांड’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया जो हॉरर एडवेंचर मे लिखी गई एक बेहतरीन किताब साबित होगी।
दूसरा सत्र : हिंदी में साइंस फिक्शन और फैंटेसी की दुनिया

सत्र को संपादक जयंत कुमार ने होस्ट किया। सत्र के सवालों का जवाब देते हुए अतिथि लेखक अतुल शर्मा ने कहा आप साइंस फिक्शन में उत्साह में आकर बहुत कुछ लिख सकते हैं लेकिन आपका एडिटर पठनीयता को ही अहमियत देगा। आप जो लिख रहें हैं अगर वह आपको रोमांचित नहीं कर पा रहा है तो वह बोरिंग ही रहेगा। हिन्दी पाठकों को हमें साइंस फिक्शन मे कुछ अलग हटकर देना होगया वरना अनुवादित किताबों तक ही उनका पठन इस विधा मे सीमित रहेगा!
दूसरे अतिथि लेखक समीर गांगुली ने कहा विज्ञान कथाओं में जो कल्पना की जाती है बहुत हद तक झूठ भी होती है। अतीत या भविष्य में जाने का जवाब देते हुए कहा मैं भविष्य में जाना चाहूंगा क्योंकि मेरे पास आधुनिक मशीन होगी, तकनीक होगी। कहानी लिखने के लिए नई पीढ़ी का शामिल होना जरूरी है लेकिन वह शामिल नहीं होना चाहते। एक बार मैने एक कहानी भेजी थी किसी संपादक को उसने उसे पब्लिश नहीं किया, क्योंकि संपादक समय से पीछे चल रहे हैं और इसके 2 साल बाद ही वह कहानी काफी प्रसिद्ध हुई। साइंस फिक्शन साइंस स्टोरी में जो फर्क होता है वो है कि हमेशा तर्क पर लिखा जाता है। हमने देखा है लेखक एलियन पर काफी लिख रहें हैं लेकिन इसकी कोई प्रमाण नहीं मिली है। दूसरे सत्र में ‘सेवन प्वाइंट सिक्स’, ‘ईना मीना डीका’ का विमोचन किया गया।
विज्ञान प्रगति पत्रिका के संपादक डॉ. मनीष गोरे ने दैनिक जीवन की घटनाओं में विज्ञान का अवलोकन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया हिंदी में मूल साइंस फिक्शन किताबों का होना बहुत जरूरी क्यों है। उनकी किताब ‘325 साल का आदमी’ फ्लाईड्रीम्स से इन दिनों खूब बिक रही है!
तीसरा सत्र : माईथो फिक्शन और सुपर हीरो की दुनिया

इस सत्र में अभिलाष दत्ता, नम्रता सिंह और नृपेंद्र शर्मा अतिथि के रूप में उपस्थित थे। जिनसे लेखक और संपादक राम पुजारी ने चर्चा की। इसमें हिंदी किताबों में सुपरहीरोज का उदय कैसे हुआ और मिथक और यथार्थ का मेल के बारे में चर्चा हुई। लेखक अभिलाष दत्ता ने बताया कैसे आजकल इस विधा मे हिन्दी की मूल किताबों को खोजकर पढ़ा जा रहा है, ये लेखन काम इसलिए भी है क्यूंकि ये विधा बहुत मेहनत मांगती है!
चौथा सत्र : किशोर साहित्य

इस सत्र को विकास नैनवाल के द्वारा होस्ट किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में सुमन बाजपेयी, नेहा अरोरा और प्रांजल सक्सेना थे । इस सत्र में नई पीढ़ी की रुचियों पर चर्चा हुई साथ ही किशोर पाठक के लिए कौन कौन सी चुनौतियां है। आखिर क्यों किशोर साहित्य में मूल हिन्दी मे शृंखला बद्ध किताबों पर ध्यान नहीं दिया गया, जो इन दिनों फ्लाईड्रीम्स समझदारी से कर रहा है, क्योंकि किशोरों के विकास के लिए ये विधा एक जरूरी विधा है, जिससे उनकी कल्पना का विकास मजबूत होता है!
पांचवां सत्र : हिंदी में बाल पॉकेट्स बुक्स की दुनिया

पांचवें सत्र में योगेश मित्तल अतिथि के रूप में मौजूद थे जिसमें उन्होंने किशोर साहित्य का लेखन पहले और मौजूदा दौर में कैसा है पर चर्चा किया साथ ही हिंदी पाठकों के रुझान पर भी प्रकाश डाला। उनकी आने वाली किताब ‘कॉकरोच के कातिल’ का पोस्टर लॉन्च हुआ, जो बाल पॉकेट शृंखला का एक नया रोमांचक क्रम होने वाला है!
छठा सत्र : फ्लाईड्रीम्स कॉमिक्स की चौपाल

छठे सत्र में मोहित शर्मा से अनमोल दुबे ने चर्चा की। मोहित ने संदीप मुरारका की लिखित भज्जू श्याम और गुलाबो सपेरा की कहानी को कॉमिक्स के रुप में ढाला है। इस पर चर्चा हुई। साथ ही इनका कवर भी लॉन्च भी किया गया। यह कॉमिक्स आदिवासी समाज के सुप्रसिद्ध लोगों की कहानी कहती है, जिसे लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
सातवां सत्र : किताबें जरा हटके रहा।

इसमें फ्लाईड्रीम्स के चिल्ड्रन विंग्स के मुख्य संपादक और लेखक ‘मिथिलेश गुप्ता’ और संपादकीय हेड ‘जयंत कुमार’ से बुकवाला के संस्थापक अनमोल दुबे ने चर्चा की। अनमोल ने ज़रा हटके किताबें विषय रखने का अर्थ पूछा। इस पर मिथिलेश ने कहा कि अलग हटके लिखना ही साहित्य को ज़िंदा रख सकता है हिन्दी की मूल किताबों मे आप देखेंगे सिर्फ एक जैसी ही विधा मे किताबें लिखकर हिट होने का एक फार्मूला बना हुआ है, हैरी पॉटर की जितनी हिन्दी अनुवादित किताबें बिक जाती है मूल हिन्दी मे उसका आधा बीकन भी मुश्किल होता नजर आता है, कारण? यही की हम कुछ नया नहीं रच रहे जो उनके कल्पना की दुनिया मे ले जाए। इसलिए हमने किताबें ज़रा हटके को ही अपनी थीम बना लिया है जो हिन्दी किताबों की भीड़ मे सबसे अलग कार्य कर रही है। जयंत कुमार ने कहा कि आज के दौर में किताबों का कवर अच्छा होना जरूरी है लेकिन उसके बाद भी फ्लाईड्रीम्स अक्सर उसमें बदलाव करती है। जिस तरह से पाठक हमसे इन विधाओ मे और किताबें लाने का अगढ़ करते हैं वो बदलाती है की साहित्य की इस दुनिया मे अभी हम कितने पीछे चल रहे हैं, इसलिए प्रयोग धर्मी विधाओं मे हम खूब कार्य कर रहे हैं! नए लेखकों और पाठकों के लिए “किताबें जरा हटके’ अब वह उम्मीद बन चुका है जिसमे वो अलग-अलग विधाओं में मूल हिन्दी की किताबें पढ़ पा रहें हैं।
आंठवे और आखिरी सत्र में आखिरी सत्र में आशीष और उनकी टीम ने शानदार कविताओं की प्रस्तुति दी।
