भारत में तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत में फैबलेस कंपनियों के विकास और बौद्धिक संपदा के सृजन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि भारत में Fabless companies की growth और intellectual properties का creation भी भारत में हो।”
आज सेमीकंडक्टर आधुनिक जीवन का आधार बन चुके हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, चिकित्सा उपकरण, वाहन, अंतरिक्ष तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए सेमीकंडक्टर का निर्माण और उनसे जुडी तकनीक पर अधिकार किसी भी देश की आर्थिक और सामरिक क्षमता को मजबूत करता है। भारत इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढाकर वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ रहा है
प्रधानमंत्री ने भारत में फैबलेस कंपनियों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। फैबलेस कंपनियां ऐसी कंपनियां होती हैं जो चिप का डिजाइन और उससे जुडी तकनीक विकसित करती हैं। इनके लिए चिप का निर्माण किसी अन्य विशेष निर्माण इकाई में किया जा सकता है। इस क्षेत्र में भारत के युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और तकनीकी उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। केवल चिप का निर्माण ही नहीं, बल्कि उसके डिजाइन, शोध और तकनीकी विकास में भी भारत की मजबूत भागीदारी आवश्यक है। बौद्धिक संपदा का निर्माण देश की तकनीकी क्षमता को दीर्घकालिक आधार प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने अलग-अलग प्रकार के कंपाउंड सेमीकंडक्टर बनाने और सिलिकॉन फोटोनिक्स को प्रणालियों का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। कंपाउंड सेमीकंडक्टर विशेष प्रकार की सामग्रियों से बनाए जाते हैं और इनका उपयोग संचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा तथा अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में होता है। सिलिकॉन फोटोनिक्स ऐसी तकनीक है जिसमें प्रकाश के माध्यम से सूचना के संचार और प्रसंस्करण की संभावनाओं का उपयोग किया जाता है। भविष्य में तेज गति से आंकडों के आदान प्रदान और उन्नत कंप्यूटिंग प्रणालियों के विकास में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के लिए अत्याधुनिक तकनीकी आधारभूत ढांचे की आवश्यकता है। शक्तिशाली कंप्यूटिंग प्रणालियां, उन्नत चिप और तेज आंकडा संचार व्यवस्था इसके लिए जरूरी हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विकास भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती तकनीकों के लिए आवश्यक आधार तैयार करने में सहायता कर सकता है।
इस उद्योग का विकास केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इससे रोजगार, शोध, शिक्षा और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी बन सकते हैं। विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढाकर कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सकता है। भारत को इस दिशा में निरंतर शोध, निवेश, कुशल कर्मचारियों के विकास और वैश्विक स्तर की निर्माण क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा सकती है। फैबलेस कंपनियों के विकास, बौद्धिक संपदा के निर्माण और उन्नत चिप तकनीक पर ध्यान देकर भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। सेमीकॉन इंडिया 2026 इसी व्यापक तकनीकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया है।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…