दो हजार रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने की घोषणा के बाद लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या अब हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगेगा? क्या किसी मित्र या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने पर भी पैसा देना होगा? जानिए नए नियम का आम व्यक्ति पर क्या असर पड़ेगा।
डिजिटल भुगतान आज हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े बाजारों तक और बिजली का बिल भरने से लेकर किसी मित्र को पैसे भेजने तक, लोग यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबर ने लोगों के बीच चिंता पैदा की है। कई लोगों को लग रहा है कि अब मोबाइल से पैसे भेजने या दुकानदार को भुगतान करने पर अतिरिक्त राशि देनी होगी।
लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। नए नियम के तहत आम व्यक्ति को यूपीआई भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। किसी मित्र, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को पैसे भेजने वाले सभी व्यक्तिगत भुगतानों को निशुल्क रखा गया है। दुकानदारों को किए जाने वाले कुछ बड़े भुगतानों पर जो शुल्क निर्धारित किया गया है, वह ग्राहक से नहीं लिया जाना है।
क्या है नया नियम?
राष्ट्रीय भुगतान निगम भारत ने 15 अक्टूबर, 2026 से यूपीआई के कुछ व्यापारी भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की है। इसके अनुसार, दो हजार रुपये से अधिक के सामान्य व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक के लिए नहीं है। इसे व्यापारी भुगतान व्यवस्था से जुड़ा शुल्क माना गया है। भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से संबंधित बैंक और भुगतान व्यवस्था के अन्य भागीदारों के बीच इस शुल्क का वितरण किया जाएगा।
उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर 5,000 रुपये का सामान खरीदता है और यूपीआई से भुगतान करता है, तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 0.4 प्रतिशत की दर से 20 रुपये का मर्चेंट डिस्काउंट रेट बन सकता है। यह राशि ग्राहक से अलग से नहीं ली जानी है। ग्राहक को सामान की निर्धारित कीमत का भुगतान ही करना होगा।
आम व्यक्ति को कोई शुल्क क्यों नहीं देना होगा?
वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर, 2026 को जारी अधिसूचना में दो हजार रुपये तक के यूपीआई भुगतानों और रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतानों पर बैंकों तथा भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों द्वारा शुल्क लगाने पर रोक स्पष्ट की है। इसके बाद 15 सितंबर को सरकार ने नए यूपीआई ढांचे की जानकारी देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत से व्यक्तिगत भुगतान किसी भी राशि के हों, वे निशुल्क रहेंगे।
इसका सीधा अर्थ है कि आम व्यक्ति के लिए यूपीआई से पैसे भेजने की सुविधा पहले की तरह बनी रहेगी। चाहे कोई व्यक्ति अपने मित्र को 500 रुपये भेजे या परिवार के किसी सदस्य को 10,000 रुपये भेजे, ऐसे व्यक्तिगत भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं लगेगा।
इसी तरह, किसी दुकान पर दो हजार रुपये तक का यूपीआई भुगतान भी निशुल्क रहेगा। दो हजार रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतानों पर शुल्क निर्धारित किया गया है, लेकिन ग्राहक से इसे वसूलने की अनुमति नहीं दी गई है।
यूपीआई के नए नियम को समझने के लिए दो प्रकार के भुगतानों के बीच अंतर जानना जरूरी है।
व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान
जब कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते से किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजता है, तो इसे व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान कहा जाता है। इसमें मित्र को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को धनराशि देना या किसी परिचित के खाते में भुगतान करना शामिल है।
ऐसे सभी व्यक्तिगत भुगतानों को नए ढांचे में निशुल्क रखा गया है। भुगतान की राशि दो हजार रुपये से अधिक होने पर भी इस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं लगेगा।
व्यक्ति से व्यापारी भुगतान
जब कोई व्यक्ति किसी दुकान, कारोबारी प्रतिष्ठान या सेवा प्रदाता को यूपीआई के माध्यम से भुगतान करता है, तो यह व्यक्ति से व्यापारी भुगतान होता है। उदाहरण के लिए, किसी दुकान से मोबाइल खरीदना, कपड़े खरीदना या किसी अन्य सामान का भुगतान करना इस श्रेणी में आ सकता है।
ऐसे सामान्य व्यापारी भुगतानों में दो हजार रुपये से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट निर्धारित किया गया है। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक पर नहीं डाला जाना है।
अलग-अलग उदाहरणों से समझिए
मान लीजिए कोई व्यक्ति अपने मित्र को 5,000 रुपये भेजता है। यह व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान है। इस पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं लगेगा। ग्राहक को अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
अब दूसरा उदाहरण लेते हैं। कोई ग्राहक किसी दुकान पर 1,800 रुपये का सामान खरीदता है। वह यूपीआई से भुगतान करता है। दो हजार रुपये तक के व्यापारी भुगतान निशुल्क रखे गए हैं। इसलिए इस भुगतान पर भी ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
तीसरे उदाहरण में कोई ग्राहक किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकान पर 25,000 रुपये का सामान खरीदता है। वह यूपीआई से भुगतान करता है। यह दो हजार रुपये से अधिक का व्यापारी भुगतान है। इस पर निर्धारित दर के अनुसार मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू हो सकता है। फिर भी यह शुल्क ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना है।
चौथे उदाहरण में कोई व्यक्ति 80,000 रुपये अपने परिवार के सदस्य के बैंक खाते में भेजता है। यह व्यक्तिगत भुगतान है। राशि अधिक होने के बावजूद इस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट नहीं लगेगा।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि केवल भुगतान की राशि देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि यूपीआई पर शुल्क लगने लगा है। भुगतान किसे किया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है।
300 रुपये की अधिकतम सीमा का क्या अर्थ है?
नए नियम में सामान्य व्यापारी भुगतानों के लिए 0.4 प्रतिशत की दर निर्धारित की गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।
उदाहरण के लिए, 75,000 रुपये के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 300 रुपये बनते हैं। यदि भुगतान की राशि इससे अधिक है, तब भी इस श्रेणी में शुल्क 300 रुपये से अधिक नहीं होगा।
यह गणना व्यापारी भुगतान व्यवस्था से जुड़े शुल्क को समझाने के लिए है। इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को 300 रुपये अलग से देने होंगे।
क्या छोटे दुकानदारों को भी शुल्क देना होगा?
नए ढांचे में छोटे दुकानदारों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट की व्यवस्था जारी रहेगी। ऐसे छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा।
इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों को डिजिटल भुगतान की सुविधा से जोड़े रखना है। किराना दुकानदार, छोटे व्यवसायी और स्थानीय सेवा प्रदाता यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते हैं। उनके लिए भुगतान की लागत कम रखना डिजिटल व्यवस्था के विस्तार में सहायक हो सकता है।
क्या यूपीआई ऐप अब अतिरिक्त शुल्क ले सकते हैं?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को यूपीआई भुगतान करते समय किसी अनपेक्षित शुल्क का सामना न करना पड़े।
बैंकों को यह सलाह भी दी गई है कि व्यापारी मर्चेंट डिस्काउंट रेट का शुल्क ग्राहकों से न वसूलें। इसलिए यदि कोई व्यापारी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने के नाम पर ग्राहक से अलग से शुल्क मांगता है, तो ग्राहक को इसकी जानकारी लेनी चाहिए और आवश्यकता होने पर संबंधित बैंक या भुगतान ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
सरकार ने यह व्यवस्था क्यों की?
यूपीआई भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसके माध्यम से हर दिन बड़ी संख्या में भुगतान होते हैं। इस व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बैंकिंग प्रणाली, तकनीकी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था और साइबर धोखाधड़ी से बचाव पर लगातार काम करना पड़ता है।
सरकार के अनुसार, नए शुल्क ढांचे का उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना है। इसके साथ ही छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डालने का प्रयास किया गया है।
सरकार ने पहले भी यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना चलाई थी। इसके अंतर्गत छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहन दिया गया। इससे देश में यूपीआई के उपयोग को बढ़ाने और छोटे कारोबारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में सहायता मिली।
जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी सामग्री जैसे कुछ क्षेत्रों में दो हजार रुपये से अधिक के भुगतानों के लिए पांच रुपये प्रति लेनदेन का निश्चित मर्चेंट डिस्काउंट रेट निर्धारित किया गया है।
पूंजी बाजार से जुड़े भुगतानों, जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर बाजार के कुछ भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत की दर रखी गई है। इस श्रेणी में भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।
इन व्यवस्थाओं का संबंध भुगतान स्वीकार करने वाले संबंधित संस्थानों से है। आम व्यक्ति को इन शुल्कों का भुगतान अलग से नहीं करना होगा।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…