महानगर झांसी में “पचकुईया माता” का ऐसा सिद्ध और प्रसिद्ध मंदिर है, जहां पर आस्था और भक्ति के साथ-साथ जनमानस यहाँ  स्वयं अपना इलाज भी करवाने आते हैं। झांसी किले के दुर्ग के पास स्थित इस मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी में ओरछा के महाराजा वीर सिंह जूदेव ने करवाया था। किले के निर्माण के दौरान ही उन्होंने इस मंदिर को भव्य रूप देकर निर्माण करवा दिया था। इस मंदिर में विशेष रूप से सभी मूर्तियों का मुख दक्षिण दिशा की और है। मंदिर के अंदर ही पांच छोटे कुएं है। इसी कारण से इस मंदिर का नाम पंचकुइयां मंदिर है। नवरात्र में पंचकुइयां पर लगने वाले मेले की परंपरा तीन सौ साल पुरानी है।

मंदिर के पुजारी पं. हरीशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि इस मंदिर में दो देवी, शीतला माता और संकटा माता एक साथ विराजती है। यहां जलाभिषेक की विशेष मान्यता है। शीतला माता लोगों को शीतलता प्रदान करती है। यह जलाभिषेक करने आए भक्त मां के चरणों का भरकर ले जाते हैं। यहां के बारे में लोकमान्यता है कि देवी के चरणों का जल पीने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। शीतला माता के साथ मंदिर में विराजमान संकटा माता को जल चढ़ाने से भक्तों के संकट दूर होते हैं। शहर के सबसे प्राचीन पंचकुइयां मंदिर में मां के दर्शन के लिए भक्त सुबह तीन बजे से ही पहुंचने लगते है, सुबह 4 बजे मंदिर में महाआरती होती है।

 

माई के दरबार में बड़ी-बड़ी बीमारियों का होता है इलाज

फलक बरई माता की पूजा करने से टाइफाइड और मलेरिया जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। अगर किसी की बीमारी लंबे समय से ठीक नहीं हो रही है, तो वह फलक बराई माता के यहाँ एक चूड़ी या चुन्नी रख कर मन्नत मांग लेता है। स्वस्थ होने का बाद यहां अंगार का सामान चढ़ाना होता है। चिकन पॉक्स होने पर लोग संकटा माता के दर्शन करते हैं। यहां नीम के पत्ते और नींबू चढ़ाने से चेचक ठीक होने को मान्यता है। दाग उतर जाने के बाद भी लोग दर्शन करने आते हैं। खिजली माता की पूजा उन बच्चों के माता पिता करते हैं, जो बहुत ज्यादा चिड़चिड़े होते हैं या रोते हैं। बच्चों की खीझ या चिड़चिड़ापन दूर करने के लिए माता-पिता यहां आकर पूड़ी और खीर चढ़ाते हैं।

गोदरी माता के पास वह लोग आते हैं, जे खसरा बीमारी से ग्रसित होते हैं। मान्यता है कि सफेद कागज पर पालक चढ़ाकर पूजा करने से यह बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है। ठीक होने के बाद भी लोग दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। मोतीझरा की बीमारी के लिए मोतीझरा माता के यहां लोग पूजा करने आते हैं। यहां लोग आकर मन्नत मांगते हैं। बीमारी ठीक होने के बाद लोग इन माता को पालक को भाजी चढ़ाते हैं।

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