बुंदेलखंड। छोटे से गांव डोगरा से निकल कर प्रदेश और देश की राजनीति का बने प्रमुख किरदार। आज हुआ उनके जीवन का सूर्य सदा के लिए अस्त। जिला संयुक्त चिकित्सालय की नव निर्मित बिल्डिंग दिलाईगी सदैव याद ,उन्ही के कार्यकाल में बनी थी चिकित्सालय की यह बिल्डिंग जिसमे उपचार की नई तकनीकों को जन्म दिया है।
बुंदेला जी डोगराकला के मूल निवासी है। मौजूदा वह सिविल लाइन स्थित गढी निवास पर रहते है। बडे़ दाऊ के उपनाम से सम्मानित सुजान सिंह बुंदेला आज हमारे बीच नहीं रहे। इनका अभी कुछ समय पूर्व परलोक गमन हो गया हैं। इन्होंने दो बार झांसी ललितपुर क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व किया इन्हें इनके प्रशंसक शेरे बुदेलखण्ड भी कहते थे।
यह काफी लम्बे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने आज अपराह्न सदा के लिए दुनिया से महाप्रयाण किया। यकीनन यह जनपद की बहुत बड़ी क्षति है।
राजनैतिक सफर
बुन्देला जी बर्ष 1980 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थे इसी वर्ष कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते।
इसके बाद वह 1984 में लोकसभा में कांग्रेस के प्रत्याशी बने और चुनाव जीते। लेकिन 1989 में हुये चुनावों में वह राजेन्द्र अग्निहोत्री से हार गये।
लेकिन हार के बाद भी जनता के बीच रहकर उनकी सेवा कर 1999 में वह फिर से लोकसभा के लिए झांसी ललितपुर सीट से चुने गये ।लेकिन 2004 लोकसभा चुनावों में वह कांग्रेस की पसंद नहीं बन सकें और कांग्रेस ने अन्य उम्मीदवार उतारा।
आहत सुजान सिंह बुंदेला ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और राष्ट्रीय समंता दल के टिकट पर 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए। और उन्होंने राजनीति से अपने को अलग कर लिया। इन्होंने दो बार लोकसभा में झांसी ललितपुर का प्रतिनिधित्व किया और बहुत सी ऐसी योजनाओ से अपने संसदीय क्षेत्र को संवारा। बहुत सी ऐसी परियोजनायें है जो उनकी याद सदैव दिलाई गी।
सादर श्रद्धांजलि

आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…