केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के अलग अलग हिस्सों में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कुल आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें पांच परियोजनाएं दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में लागू होंगी। इनके तहत भारतीय रेल नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं पर करीब 10,021 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वहीं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इनसे रेल नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी और इन परियोजनाओं पर करीब 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मल्टीट्रैकिंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। अभी कई प्रमुख रेल मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों को एक ही मार्ग पर चलना पड़ता है। इससे कई बार ट्रेनों को दूसरे ट्रैक के खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। नए ट्रैक बनने से इस समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
दक्षिण भारत में होने वाला यह विस्तार तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के कई जिलों को बेहतर रेल संपर्क देगा। इससे यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक माल पहुंचाने की क्षमता भी बढ़ेगी। इन राज्यों में उद्योग, कृषि और व्यापार के लिए तेज और भरोसेमंद रेल संपर्क महत्वपूर्ण है।
पूर्वी और मध्य भारत में 656 किलोमीटर का विस्तार भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में कच्चा माल और तैयार उत्पाद देश के अलग अलग हिस्सों तक पहुंचाए जाते हैं। अतिरिक्त रेल लाइनें माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगी।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
आपकी लेखन की कला बहुत ही स्पष्ट और मन को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस लेख के माध्यम…